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आत्मा के दरवाजे पर दस्तक
जैन धर्म का सबसे महत्वपूर्ण पर्व पर्यूषण है। सच कहूं तो कुछ समय पहले तक मैं भी इस पर्व के बारे में बहुत अधिक नहीं जानता था। लेकिन जब इसके अर्थ, उद्देश्य और संदेश को समझने का प्रयास किया, तो लगा कि यह केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर झांकने और स्वयं को बेहतर बनाने का अवसर है। आज के समय में जब हम बाहर की दुनिया को बदलने में लगे रहते हैं, पर्यूषण हमें अपने भीतर की दुनिया को देखने की प्रेरणा देता है। पर्यूषण का शाब्दिक अर्थ है—अपने भीतर लौटना, आत्मा के निकट जाना। यह आत्मचिंतन, आत्मशुद्धि, तप, संयम और क्षमा-याचना का पर्व है। यूं…
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बदलाव के दौर की जेन ज़ी
आज की दुनिया में जेन ज़ी सबसे अधिक चर्चा में रहने वाली पीढ़ियों में से एक है। सोशल मीडिया, स्मार्टफोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्टार्टअप संस्कृति और तेजी से बदलती कार्यशैली ने इस पीढ़ी को समाज के केंद्र में ला खड़ा किया है। लेकिन एक दिलचस्प सवाल यह है कि कुछ वर्ष पहले की युवा पीढ़ी और आज की युवा पीढ़ी में कितना अंतर आ गया है? क्या दोनों की सोच, काम करने का तरीका और जीवन के प्रति नजरिया एक जैसा है, या बदलती तकनीक और परिस्थितियों ने इन्हें अलग बना दिया है? दरअसल, जेन ज़ी को सामान्य रूप से उन लोगों की पीढ़ी माना जाता है जिनका जन्म लगभग 1997…
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सावन को आने दो…
आज जब मैं अपने कंप्यूटर में बैठकर कीबोर्ड पर यह लेख टाइप कर रहा था तो बाहर अचानक बादल गर्जने लगे और थोड़ी देर में झमाझम बारिश होने लगी। शहरों में तो सभी मकान कंक्रीट के हैं। यहां बारिश गिरने का जो दृश्य या आनंद आता है वह नहीं मिलता। खैर, मेरे मकान की निचली मंजिल में बाहर आंगन में लोहे की टीन की छत्त डाल रखी है। जब भी हल्की बारिश शुरू होती है तो छत में गिरती वर्षा की बूंदें एक ध्वनि पैदा करती है जो एक अलग ही आनंद देता है। यूं कह लें बचपन की यादें ताजा हो जाती हैं। समय के साथ बारिश की झमाझम…
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आरती, स्तोत्र और साधना-यात्रा
काफी समय से मैं ब्लॉग पर नियमित रूप से लेख नहीं लिख पा रहा था। इसका प्रमुख कारण यह रहा कि मैं पिछले कई वर्षों से एक ऐसे धार्मिक ग्रंथ के निर्माण में संलग्न था, जिसमें सभी आरतियाँ और स्तोत्र पूर्णतः शुद्ध, प्रमाणिक और त्रुटिरहित रूप में संकलित किए जा सकें। 📥 आरती संग्रह PDF डाउनलोड करें भारतीय सनातन परंपरा में प्रातःकाल का समय अत्यंत पवित्र माना गया है। प्रत्येक सनातनी व्यक्ति अपने गुरु और ईश्वर का स्मरण कर, आरतियों एवं स्तोत्रों के माध्यम से भक्ति भाव व्यक्त करता है। यह साधना मन को शांति, स्थिरता और दिनभर सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती है। किन्तु व्यक्तिगत अनुभव में मुझे यह महसूस हुआ कि…
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क्या खो रहे हैं हम?
आज की डिजिटल दुनिया में ‘लाइक’, ‘थम्ब्स अप’ और ‘कमेंट्स’ केवल प्रतिक्रिया के साधन नहीं रह गए हैं, बल्कि कई लोगों के लिए आत्म-सम्मान का पैमाना बन चुके हैं। हम देख रहे हैं कि आज की पीढ़ी सोशल मीडिया पर लोकप्रियता पाने के लिए किस हद तक जाने को तैयार हो जाती है। फॉलोवर्स बढ़ाने की होड़ में कई बार लोग अपनी असली पहचान, अपने मूल्य और अपनी गरिमा तक दांव पर लगा देते हैं। सवाल यह है कि क्या कुछ सेकंड की वायरल प्रसिद्धि सच में उस कीमत के लायक है? आज का दौर दिखावे का दौर बन गया है। लोग अपने जीवन के हर छोटे-बड़े पल को इस…










